23 मई को खुलेंगे श्री हेमकुंट साहिब के कपाट - MeraUK.com

23 मई को खुलेंगे श्री हेमकुंट साहिब के कपाट

देहरादून 16 मार्च। गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव श्री आनंद बर्धन से आगामी तीर्थयात्रा सीजन की तैयारियों पर चर्चा करने के लिए मुलाकात की। विस्तृत विचार-विमर्श के बाद तथा वर्तमान मौसम स्थितियों का आकलन करने के पश्चात्, दोनों ने पवित्र गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब के कपाट शनिवार, 23 मई 2026 को खोलने पर आपसी सहमति व्यक्त की।

ट्रस्ट राज्य सरकार के समन्वय से इस यात्रा का संचालन करता है तथा तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए हरिद्वार, ऋषिकेश, श्रीनगर, रतूड़ा, जोशीमठ, गोविंदघाट और घांघरिया में अपनी धर्मशालाओं में मुफ्त ठहरने और भोजन की व्यवस्था करता है। श्री हेमकुंट साहिब पर भी लंगर परोसा जाता है, लेकिन उच्च ऊंचाई और सीमित सुविधाओं के कारण तीर्थयात्रियों को रात्रि विश्राम की अनुमति नहीं है।

यह निर्णय पिछले वर्षों की तुलना में कम बर्फबारी होने के कारण संभव हुआ है, जिससे जलवायु परिस्थितियां यात्रा के शीघ्र आरंभ के लिए अनुकूल सिद्ध हो रही हैं। हालांकि, जलवायु परिवर्तन के कारण इस वर्ष कम बर्फ पड़ी है, लेकिन मौसम अप्रत्याशित रहता है। पिछले वर्षों के रुझान को ध्यान में रखते हुए, यात्रा को इस वर्ष थोड़ा पहले आरंभ करने का निर्णय ट्रस्ट द्वारा लिया गया है। इस वर्ष चारधाम के पवित्र मंदिरों के कपाट अप्रैल माह में खोले जाने का कार्यक्रम निर्धारित है। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया तथा कहा कि उत्तराखंड सरकार चारधाम तथा श्री हेमकुंट साहिब आने वाले सभी तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित, सुगम एवं सुव्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करने हेतु हर संभव प्रयास करेगी।

गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब विश्व भर के श्रद्धालुओं, विशेषकर सिख धर्म में अत्यंत गहन आध्यात्मिक महत्व रखता है, क्योंकि यह वह पवित्र स्थल है जहां दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने ध्यान किया था। हिमालय की मनोरम श्रृंखलाओं के बीच 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित यह गुरुद्वारा शांति, चिंतन एवं ईश्वरीय अनुभूति की तलाश में आने वाले श्रद्धालुओं को एक दिव्य एवं शांत वातावरण प्रदान करता है। प्रत्येक वर्ष विश्व भर से हजारों श्रद्धालु इस यात्रा के लिए उत्सुक रहते हैं, जो विश्व स्तर पर श्रद्धा, एकता एवं आध्यात्मिक नवीनीकरण का प्रतीक बन चुकी है।

ट्रस्ट की अपील
ट्रस्ट सभी तीर्थयात्रियों से अनुरोध करता है कि उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें तथा यात्रा की पूर्ण तैयारी करें। यात्रा व्यवस्थाओं, पंजीकरण, सड़क स्थिति तथा अन्य दिशा-निर्देशों से संबंधित आगे की जानकारी समय-समय पर आधिकारिक माध्यमों से साझा की जाएगी।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *