कोरोना की दस्तक के बीच गरिमा दसौनी ने सरकार पर किया हमला - MeraUK.com

कोरोना की दस्तक के बीच गरिमा दसौनी ने सरकार पर किया हमला

भगवान भरोसे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था -गरिमा मेहरा दसौनी

देहरादून 20 अप्रैल। उत्तराखंड में कोरोना महामारी एक बार फिर से दस्तक दे चुकी है, लगातार कोरोना मरीजों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है हर दिन समाचार पत्रों में कोरोना से हुई मौतों का ब्यौरा भी दिया जाता है। इन सभी बातों के ध्यान में रखते हुए स्वास्थ विभाग की तैयारियों और व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी और प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट ने गुरुवार दोपहर 1.00 बजे केंद्रीय औषधालय चंदन नगर का औचक निरीक्षण किया। दसौनी ने बताया कि केंद्रीय औषधालय की स्थिति हतप्रभ करने वाली थी। दसौनी ने बताया कि 2019-20 में कोरोना महामारी के दौरान खरीदे गए करोड़ो के उपकरण जैसे ऑक्सीजन, कंसंट्रेटर, मॉनिटर्स, रेफ्रिजरेटर्स इत्यादि अभी भी केंद्रीय औषधालय में यथावत पड़े हुए हैं, लेकिन उसके बावजूद सामान की डिमांड केंद्र को भेजी जा चुकी है ,दसोनी ने सवाल किया कि जब महानिदेशालय सामान की खरीदारी कर चुका था, तो सीएमओ स्तर पर भी डिमांड क्यों भेजी जा रही है ?

उन्होंने कहा कि महानिदेशालय में खरीदारी या तो मात्र पैसों को ठिकाने लगाने के लिए की जा रही है या अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए, उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य महानिदेशालय का एकमात्र फोकस खरीदारी करना रह गया है जरूरतमंद लोगों तक यह दवाइयां या उपकरण पहुंचे वह निदेशालय की प्राथमिकता में नहीं है । उन्होंने कहा कि श्रीनगर में एक नई कैथ लैब स्थापित की जा रही है, लेकिन इस तरह की कैथ लैब का औचित्य क्या रह जाता है जब पूरे सरकारी स्वास्थ्य महकमे में मात्र एक कार्डियोलॉजिस्ट उपलब्ध है? दसौनी ने कहा की बड़ी संख्या में 108 की नई खरीद हुई गाड़ियां स्वास्थ्य महानिदेशालय में डंपयार्ड में पड़ी हुई है जो कि आमजन के लिए जीवनदायिनी का काम कर सकती परंतु उनकी कोई सुध लेने वाला नहीं।

इस दौरान पार्टी प्रवक्ता शींशपाल सिंह बिष्ट ने कहा कि यहां गोदाम में करोड़ों रूपयों की दवाईयां और भारी मात्रा में उपकरण भरे पडे हैं और प्रदेश के जनपदों और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में औषधियां और उपकरण नही हैं। दवाईयों और उपकरणों के अभाव में आम जन को समय से स्वास्थ्य सेवायें नही मिल पा रही हैं जिस कारण उन्हें मैदानी जनपदों में प्राइवेट अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है आंखिर ये क्या गडबड झाला है। कहीं ऐसा तो नही कि सरकारी तंत्र की सांठगांठ पाईवेट माफिया से हो। उन्होंनंे कहा कि जब गोदाम भरे पडें है तो ये आम जन तक क्यों नही पहुॅच पा रहे हैं ये बड़ा सवाल है आंखिर आमजन के हक पर डाका कौन डाल रहा है।

उन्होंने कहा कि ऐसा कोई दिन नही है जिस दिन खस्ताहाल स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में आमजन को दिक्कत ना झेलनी पड़ती हो गर्भवती महिलाओं की मौतें आम हैं कभी-कभी जच्चा बच्चा दोनों की मौत हो जाती है लेकिन समय से उन्हें स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध नही हो पाती बच्चें बुर्जुग एवं महिलाये स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में लगातार परेशानी झेलने को मजबूर हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग इन समस्याओं का कोई भी समाधान नही कर पा रहा है। जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया गया। क्योंकि प्राईवेट माफिया को लाभ पहॅुचाना ही शायद इनका मकसद है।

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