हेनरी बी. कागन और केन्सो सोआई को रसायन विज्ञान के क्षेत्र में मिला नोबेल पुरस्कार - MeraUK.com

हेनरी बी. कागन और केन्सो सोआई को रसायन विज्ञान के क्षेत्र में मिला नोबेल पुरस्कार

स्वीडिश रॉयल एकेडमी ऑफ साइंसेज ने 2026 का नोबेल पुरस्कार रसायन विज्ञान के क्षेत्र में हेनरी बी. कागन और केन्सो सोआई को देने की घोषणा की है। दोनों वैज्ञानिकों को असमेट्री ऑर्गेनिक सिंथेसिस में नॉन लीनियर इफेक्ट्स और ऑटोकेटेलिसिस की खोज के लिए यह पुरस्कार दिया गया है।

उनके शोध से यह समझने में मदद मिली कि रासायनिक प्रतिक्रियाओं में एक ही दिशा वाले अणु कैसे बन सकते हैं। इसे होमोचिरैलिटी कहा जाता है। यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई अणु दो रूपों में पाए जाते हैं, जो एक दूसरे के मिरर इमेज होते हैं। हालांकि, जीवित प्राणी आम तौर पर इनमें से केवल एक रूप का इस्तेमाल करते हैं।

कुछ अणु, जैसे अमीनो एसिड, दो रूपों में पाए जाते हैं, जो एक दूसरे के मिरर इमेज होते हैं। इन रूपों को एनैंटियोमर्स कहा जाता है। रासायनिक प्रतिक्रियाओं में दोनों रूप बन सकते हैं, लेकिन पृथ्वी पर जीवन मुख्य रूप से इनमें से केवल एक रूप का इस्तेमाल करता है। उदाहरण के लिए, जीवित कोशिकाओं में प्रोटीन बनाने वाले अमीनो एसिड एक खास दिशा वाले रूप में पाए जाते हैं, जबकि उनके मिरर इमेज वाले रूप प्रकृति में बहुत कम मिलते हैं।

वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यह रासायनिक असमानता यानी होमोचिरैलिटी कैसे पैदा हुई। होमोचिरैलिटी शब्द ग्रीक भाषा के उन शब्दों से बना है, जिनका अर्थ ‘एक जैसा’ और ‘हाथ’ होता है। इसे इंसान के बाएं और दाएं हाथ से समझा जा सकता है। दोनों एक दूसरे के मिरर इमेज होते हैं, लेकिन एक दूसरे पर पूरी तरह नहीं रखे जा सकते।

कागन और सोआई के शोध की अहमियत
जब वैज्ञानिकों ने ऐसी रासायनिक प्रतिक्रियाओं का अध्ययन किया, जिनसे दो मिरर इमेज वाले अणु बन सकते थे, तो आम तौर पर दोनों रूप लगभग बराबर मात्रा में बनते थे। लेकिन कई मामलों में केवल एक रूप बनाना जरूरी होता है। खासकर ऐसी दवाओं और दूसरे अणुओं को बनाने में, जो जीवित कोशिकाओं के साथ प्रतिक्रिया करते हैं।

2026 का नोबेल पुरस्कार उन खोजों के लिए दिया गया है, जिन्होंने वैज्ञानिकों को इन रासायनिक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने और एक मिरर इमेज वाले रूप को दूसरे की तुलना में अधिक मात्रा में बनाने में मदद की।

हेनरी कागन ने 1986 में इस दिशा में अहम सफलता हासिल की। उन्होंने रासायनिक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने का एक नया तरीका खोजा। उनके काम से पता चला कि पहले की तुलना में एक मिरर इमेज वाले अणु की मात्रा दूसरे की तुलना में काफी ज्यादा की जा सकती है। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली कि रासायनिक प्रतिक्रियाएं एक रूप को दूसरे रूप की तुलना में अधिक मात्रा में क्यों बना सकती हैं।

इसके बाद केन्सो सोआई ने इस काम को आगे बढ़ाया। 1995 में उन्होंने ऐसी रासायनिक प्रतिक्रिया तैयार की, जिसमें एक ही दिशा वाले अणु बनने की क्षमता थी। 2003 में उन्होंने इसे सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया और ऐसी प्रतिक्रिया दिखाई, जिसमें दो संभावित मिरर इमेज वाले रूपों में से केवल एक रूप बना। नोबेल समिति की रसायन विज्ञान समिति के अध्यक्ष हेनर लिंक ने कहा कि हेनरी कागन और केन्सो सोआई ने एक सदी से भी पुराने रासायनिक रहस्य का समाधान खोजने में मदद की है कि होमोचिरैलिटी अपने आप कैसे पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि दोनों वैज्ञानिकों द्वारा विकसित रासायनिक प्रतिक्रियाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं।

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