नैनीताल 12 अप्रैल। उत्तराखंड में चार धाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होने वाली है। मगर इस बीच यात्रा को लेकर उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को तीर्थयात्रा के सुचारू और सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक निर्णयों में तेजी लाने का निर्देश दिया है ।मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ जनहित याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई कर रही थी, जिसमें स्वयं याचिकाकर्ता गौरी मौलेखी द्वारा दायर एक याचिका भी शामिल थी। जिसमें तीर्थयात्रियों और जानवरों दोनों के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए यात्रा की तैयारियों से संबंधित प्रावधान थे।
अदालत ने 8 अप्रैल के आदेश में कहा, “चूंकि यात्रा जल्द ही शुरू होने वाली है, इसलिए यह वांछनीय है कि मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) में संशोधन आज से तीन सप्ताह के भीतर सकारात्मक रूप से लागू किए जाएं… हम समिति के अध्यक्ष से यह भी अनुरोध करते हैं कि वे तीन सप्ताह के भीतर समिति की एक और बैठक बुलाएं ताकि पहले से लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन की निगरानी की जा सके और अन्य अनसुलझे पहलुओं पर निर्णय लिया जा सके।” 16 मार्च को उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को 2026 की चार धाम यात्रा के दौरान पशु क्रूरता को रोकने और रसद संबंधी अव्यवस्था को संभालने के लिए 18 सदस्यीय विशेष समिति गठित करने का निर्देश दिया था ।
हाई कोर्ट ने सरकार से पशुओं के प्रति अत्याचारों को रोकने और तीर्थयात्रियों के लिए चार धाम यात्रा को सुगम बनाने हेतु मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) में संशोधन करने को कहा। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से तीर्थयात्रा के दौरान उपयोग किए जाने वाले पशुओं के लिए मार्गों पर पशु चिकित्सालय स्थापित करने के सुझाव पर विचार करने को भी कहा।
राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि सुविधा बढ़ाने और पशुओं की देखभाल सुनिश्चित करने के लिए संशोधित मानक संचालन (एसओपी) पहले ही जारी किया जा चुका है। हालांकि, अदालत ने कहा कि तीर्थयात्रियों या पशुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए एसओपी की दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए और मामले की सुनवाई तीन सप्ताह बाद के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले गठित एक समिति ने जून 2024 में जारी मौजूदा मानक संचालन (एसओपी) के स्थान पर एक नया मानक संचालन (एसओपी) तैयार करने की सिफारिश की थी। तात्कालिकता को देखते हुए, पीठ ने निर्देश दिया कि एसओपी में संशोधन तीन सप्ताह के भीतर पूरा किया जाए, यह देखते हुए कि तीर्थयात्रा शुरू होने वाली है।
अदालत ने अस्पताल परियोजना में देरी पर जताई चिंता
न्यायालय की चिंता का मुख्य कारण रुद्रप्रयाग जिले के कोटमा में प्रस्तावित पशु चिकित्सालय के निर्माण में हो रही देरी थी । इस सुविधा का उद्देश्य यात्रा के दौरान आवश्यक चिकित्सा देखभाल प्रदान करना है, जिसमें लाखों तीर्थयात्री कठिन इलाकों को पार करते हैं।